
हमारी भावनाएं
हमारी भावनाएँनन्हे शिशुओं की तरह खेलती रहती हैंमन के धूल भरे आँगन में हाथ-पैर लिथड़ जाते हैं धूल मेंकपड़ों पर फैल जाती है गंदगीऔर अँगनाई
हमारा पहला पड़ाव था “अडालज की वाव” । वाव या बावड़ी या, अंग्रेज़ी में, Stepwell, का इतिहास बहुत पुराना है । पानी को संचय करनेवाली..
श्री जसवंत सिंह जी बाँठिया के, 20 वीं सदी के मध्य में जन्मे पौत्र-पौत्रियाँ, अपने जीवन के ८ वें / ९ वें दशक में पहुँच..
कहा कुछ तुमने ?– सुना नहीं, दुआ थी या बद्दुआ, पता नही । हाँ और ना से, हक़ीक़त बदलते देखी बातों का अब मुझे, आसरा नहीं ।..
बचपन में हम एक छोटी सी औद्योगिक बसाहट में रहते थे – तीन बँगले, ८-१० क्वार्टर, मजदूरों की बस्ती, एक डिस्पेंसरी और बैरकनुमा ऑफिसों के..
विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..
विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..
व्यक्तिगत घटनाएँ जुड़ी वैश्विक घटनाएँ ७ मई १८९७अकुबाई चिटणीस का जन्म २१ जून १८९९ गोपालराव (आज़ोबा) का जन्म २१ जून..
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तो मज़ा नहीं गर ज़िंदगी में ग़म ही ग़मआँखें नम ही नम होंतो मज़ा नहीं ग़र ज़िन्दगी में मौजां इ मौजां होंहोठों पर मुस्कान ही..
बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर । // काम क्रोध मद लोभ की, जब लग घट में खानि । कबीरदास जी संत कहे..
Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone. He also deals..
Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone. He also deals..
For my friends “Raj and Saroj Wadhwa” Look at the flower in lasting gaze, you’ll find a beauty like never before,You’ll sense a union with..
साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय । // जाति न पूछो साधु की , पूछ लीजिए ज्ञान । कबीरदास जी संत कहे जाते हैं, पर..

हमारी भावनाएँनन्हे शिशुओं की तरह खेलती रहती हैंमन के धूल भरे आँगन में हाथ-पैर लिथड़ जाते हैं धूल मेंकपड़ों पर फैल जाती है गंदगीऔर अँगनाई

कमोदिनी जलहरि बसै , चंदा बसै अकास । ////// धीरे-धीरे रे मना , धीरे सब कुछ होय । कबीरदासजी संत कहे जाते हैं, पर इनके

सब ही भूमि बनारसी, सब निर गंगा होय ///// जीवन में मरना भला, जो मरि जाने कोय कबीरदासजी संत कहे जाते हैं, पर इनके विचारों