
मुट्ठी में दुअन्नी
बचपन में हम एक छोटी सी औद्योगिक बसाहट में रहते थे – तीन बँगले, ८-१० क्वार्टर, मजदूरों की बस्ती, एक डिस्पेंसरी और बैरकनुमा ऑफिसों के
मनुष्यों के अस्तित्व के लिए पानी आवश्यक है । इसलिए, जैसे-जैसे मानव जाति खानाबदोश “शिकार-संग्रह” जीवन शैली से “कृषिवाद” तक आगे बढ़ी, उन्होंने एक स्थान..
हमारा पहला पड़ाव था “अडालज की वाव” । वाव या बावड़ी या, अंग्रेज़ी में, Stepwell, का इतिहास बहुत पुराना है । पानी को संचय करनेवाली..
श्री जसवंत सिंह जी बाँठिया के, 20 वीं सदी के मध्य में जन्मे पौत्र-पौत्रियाँ, अपने जीवन के ८ वें / ९ वें दशक में पहुँच..
कहा कुछ तुमने ?– सुना नहीं, दुआ थी या बद्दुआ, पता नही । हाँ और ना से, हक़ीक़त बदलते देखी बातों का अब मुझे, आसरा नहीं ।..
बचपन में हम एक छोटी सी औद्योगिक बसाहट में रहते थे – तीन बँगले, ८-१० क्वार्टर, मजदूरों की बस्ती, एक डिस्पेंसरी और बैरकनुमा ऑफिसों के..
व्यक्तिगत घटनाएँ जुड़ी वैश्विक घटनाएँ ७ मई १८९७अकुबाई चिटणीस का जन्म २१ जून १८९९ गोपालराव (आज़ोबा) का जन्म २१ जून..
व्यक्तिगत घटनाएँ जुड़ी वैश्विक घटनाएँ ६ जनवरी १९६३नीलिमा का जन्म (मुंबई)विवेक का जन्म (बंगलौर) ६ जनवरी १९६३वैकुंठ एकादशी १९६३ से १९६९बचपन, मुंबई में १९६९ से..
मैं इस पुस्तक के शोध, लेखन, संपादन और प्रकाशन के साथ मुझे प्रेरित करने और मेरी मदद करने के लिए अनेकानेक लोगों को धन्यवाद देना..
कमोदिनी जलहरि बसै, चंदा बसै अकास । ///// माखी गुड़ में गड़ि रही, पंख रहा लपटाय । कबीरदासजी संत कहे जाते हैं, पर इनके विचारों..
लंबा मारग, दूर घर, बिकट पंथ बहु मार । ///// कबीर निर्भय राम भज, जब लगि दीवै बाति । कबीरदासजी संत कहे जाते हैं, पर..
I am 4, frail and tired, lost my wayWandering through the bomb blast, I walked awayMy home, pray tell, how far is it?Left or right..
पानी मिलै न आपको, औरन बकसत क्षीर । ///// कबीर संगत साधु की ज्यौं गंधी का बास। कबीरदासजी संत कहे जाते हैं, पर इनके विचारों..
निन्दक नियरे राखिये, आँगन कुटी, छवाय । // जहाँ दया तहाँ धर्म है, जहाँ लोभ तहाँ पाप । कबीरदास जी संत कहे जाते हैं, पर..
Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone. He also deals..

बचपन में हम एक छोटी सी औद्योगिक बसाहट में रहते थे – तीन बँगले, ८-१० क्वार्टर, मजदूरों की बस्ती, एक डिस्पेंसरी और बैरकनुमा ऑफिसों के
आनंदमयी आत्मा खुशी ढूँढती है, चलने को तत्पर जहाँ तक भी जानाआँखो ने देखी जो माया की नगरी, मन ने तड़प के कहा यह है

ये दोहे श्री अनूप जलोटा के गाये हुए “कबीर दोहे” की धुन पर सजते हैं दान में नाम नहीं, नाम से दान नहीं ।नाम है तो दान