
Self-improvement (1)
The perfecting of one’s self is the fundamental baseof all progress and all moral development. — Confucius आत्मसुधार (१) सभी प्रगति और सभी नैतिक विकास
विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..
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Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone. He also deals..
जल में कुंभ, कुंभ में जल है, बाहर – भीतर पानी । // जाका गुरु है आँधरा, चेला है जाचंध । कबीरदास जी संत कहे..
The mysterious nature of love is that no one has ever, to my knowledge, arrived at a truly satisfactory definition of love. —-M. Scott Peck..
मन के पागलपन को देखो चंचल है यह नादां ऐसे मंदिर में पूजा में बैठा, बुनता है यह सपने कैसे महल बने इक सुंदर मेरा,..
I do not want India to be an economic superpower, I want India to be a happy country. — J.R.D. Tata समृद्धि या खुशी मैं..
Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone. He also deals..

The perfecting of one’s self is the fundamental baseof all progress and all moral development. — Confucius आत्मसुधार (१) सभी प्रगति और सभी नैतिक विकास

अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप । // जहाँ काम तहाँ नाम नहिं, नाम नही वहँ काम । कबीरदास जी संत

कबीर के दर्शन में “प्रेम” की अवधारणा (Concept) कबीरदास जी ने प्रेम संबंधी भी कई दोहे रचे हैं किंतु उनका अर्थ समझने के लिए हमें