Dear Rain

My love, my heart whispers to you,In your gentle drops,...

मेरी अज्जी और मैं (९/२१)

विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय...

मेरी अज्जी और मैं (८/२१)

विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय...

Featured / विशेष

मेरी अज्जी और मैं (१८/२१)

विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..

मेरी अज्जी और मैं — पुस्तक समर्पण

यह पुस्तक समर्पित है —– परम प्रेम और श्र्द्धा के साथ मेरी प्रिय अज्जी – डॉ. सरलादेवी खोत को, जो सदा मेरी गुरु और जीवन..

मेरी अज्जी और मैं (७/२१)

विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..

Most read / लोकप्रिय

Thus Spake Kabeer 12

Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone.  He also deals..

Thus Spake Kabeer 41

Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone. He also deals..

कहत कबीर ५२

सुख के संगी स्वारथी, दुःख में रहते दूर । ////// पहिले यह मन काग था, करता जीवन घात । कबीरदासजी संत कहे जाते हैं, पर..

Thus Spake Kabeer 19

Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone.  He also deals..

Yesterday and Tomorrow

(बीता हुआ ) कल और (आने वाला) कल साल में दो दिन ऐसे होते हैं जब हम कुछ नहीं कर सकते,बीता हुआ कल और आने..

सपने

आज सुबह बिस्तर से चादर हटाई तो देखा……………बिस्तर पर रात के सपनों के शव बिखरे थेऔर मेरे सूखे आंसुओं के दाग लगे थे……………जिगर के दर्द..

Prose/गद्य

संदेशे जाते हैं

मेरी उम्र लगभग 13–14 साल रही होगी जब मेरे ननिहाल में सुखदेई नाम की रसोईदारिन रहती थी । महीने दो महीने में जब भी मेरा

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Poetry/पद्य

आनंद का ठिकाना

आनंदमयी आत्मा खुशी ढूँढती है, चलने को तत्पर जहाँ तक भी जानाआँखो ने देखी जो माया की नगरी, मन ने तड़प के कहा यह है

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Inspirational / प्रेरक

आध्यात्मिक (Spiritual)

कहत कबीर ४१

करनी तज कथनी कथै, अज्ञानी दिन रात । ///// मन के मते न चालिए, मन के मते अनेक । कबीरदासजी संत कहे जाते हैं, पर

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