Dharma Purushārtha

The word Purushārtha means human goals. In our spiritual texts,...

Purushārtha and Āshram Vyavasthā (System) – in Hindu Philosophy

The word Purushārtha means Human Goals. In our spiritual texts,...

वाव / बावड़ी /Step-well

मनुष्यों के अस्तित्व के लिए पानी आवश्यक है । इसलिए,...

Featured / विशेष

मेरी अज्जी और मैं — पुस्तक समर्पण

यह पुस्तक समर्पित है —– परम प्रेम और श्र्द्धा के साथ मेरी प्रिय अज्जी – डॉ. सरलादेवी खोत को, जो सदा मेरी गुरु और जीवन..

मेरी अज्जी और मैं (११/२१)

विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..

मेरी अज्जी और मैं (१६/२१)

विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..

Most read / लोकप्रिय

एक हास्यास्पद विडंबना

एक हास्यास्पद विडंबना यह कैसी विडंबना है कि हमारे कुछ समुदायों (communities) में महिलायें भगवान का नाम भी नहीं ले सकती हैं? उन बिचारियों के..

Thus Spake Kabeer 49

Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone. He also deals..

कुछ शेर

अर्सा (लंबा समय) हो गया , “बदले” का इंतज़ार करकेथके बदले ने भी अब, बदलने की ठान ली है गर्ज़ (जरूरत) है आपकी मुहब्बत काअर्ज़..

कहत कबीर ३०

साईं इतना दीजिए , जामें कुटुम समाय । ///// रूखी सूखी खाय के ठंडा पानी पीव । कबीरदासजी संत कहे जाते हैं, पर इनके विचारों..

कहत कबीर ३६

सतगुरु दीनदयाल हैं, दया करी मोहि आय । ///// सिख तो ऐसा चाहिए, गुरु को सब कुछ देय। कबीरदासजी संत कहे जाते हैं, पर इनके..

कहत कबीर १३

साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय । // जाति न पूछो साधु की , पूछ लीजिए ज्ञान । कबीरदास जी संत कहे जाते हैं, पर..

Prose/गद्य

अन्दर-बाहर

हमारी भावनाएँनन्हे शिशुओं की तरह खेलती रहती हैंमन के धूल भरे आँगन में हाथ-पैर लिथड़ जाते हैं धूल मेंकपड़ों पर फैल जाती है गंदगीऔर अँगनाई

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Poetry/पद्य

टूटे-फूटे ख़याल

सपने और यादें तेरी यादें कभी मेरे जहन से जाती ही नहींतेरे सपने मेरी आँखों से कभी टलते ही नहींमैं तो उलझ जाता हूँ ये

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Inspirational / प्रेरक

आध्यात्मिक (Spiritual)

कहत कबीर १८

भगति दुहेली राम की, जैसी खाँड़े की धार । // कोई एक पावै संत जन, जाके पाँचूँ हाथि। कबीर संत कहे जाते हैं, पर इनके

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