लफ़्ज़ों में क्या रखा है
कहा कुछ तुमने ?– सुना नहीं, दुआ थी या बद्दुआ, पता नही । हाँ और ना से, हक़ीक़त बदलते देखी बातों का अब मुझे, आसरा नहीं ।
विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..
विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..
विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..
विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..
विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..
विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..
विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..
डॉ. कुसुम बाँठिया दिल्ली में कॉलेजों तथा विश्वविद्यालय में तीस वर्ष तक हिन्दी भाषा तथा साहित्य का प्राध्यापन करने के बाद सेवानिवृत्त हुई हैं ।..
विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..
Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone. He also deals..
मैंने ग़ालिब से पूछा, “ग़ालिब ये शायरी किस बला का नाम है?”“ए नामुराद, क्यों मुझे यार के सपनों से जगाता है”मैं भी ज़िद्दी ठहरा—“ग़ालिब मुझ..
सर्जन का संगीत धरती पर झरते रहते हैं बीज निरंतरकितने उनमें वृक्ष घनेरे/नन्हे पौधे बन पाते हैं?उन्हें चाहिए क्षिति-जल-पावक-गगन-समीरण —धरती — जो अपनी गोदी में..
लाडू, लावन, लापसी, पूजा चढ़े अपार । ///// न्हाए धोए क्या हुआ , जो मन मैल न जाय । कबीरदासजी संत कहे जाते हैं, पर..
Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone. He also deals..
कहा कुछ तुमने ?– सुना नहीं, दुआ थी या बद्दुआ, पता नही । हाँ और ना से, हक़ीक़त बदलते देखी बातों का अब मुझे, आसरा नहीं ।

माया मुई न मन मुआ, मर मर गया सरीर । // चलती चाकी देखकर, दिया कबीर रोय । कबीरदास जी संत कहे जाते हैं, पर

“I will not look at another’s bowl intent on finding fault” — a training to be observed — Gautam Buddha आत्मबोध (४) “मैं किसी दूसरे