मेरी अज्जी और मैं (९/२१)

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मेरी अज्जी और मैं (८/२१)

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मेरी अज्जी और मैं (७/२१)

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Featured / विशेष

मेरी अज्जी और मैं — लेखक के बारे में

डॉ. नीलिमा कडाम्बी पेशे से एक सर्जन और स्वास्थ्यरक्षक हैं । जनकल्याण और समग्रस्वस्थता से जुड़ाव इनका केवल पेशा ही नहीं, बल्कि जुनून है ।..

मेरी अज्जी और मैं (२/२१)

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मेरी अज्जी और मैं (१५/२१)

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आनंद का ठिकाना

आनंदमयी आत्मा खुशी ढूँढती है, चलने को तत्पर जहाँ तक भी जानाआँखो ने देखी जो माया की नगरी, मन ने तड़प के कहा यह है..

लफ़्ज़ों में क्या रखा है

कहा कुछ तुमने ?– सुना नहीं, दुआ थी या बद्दुआ,  पता नही । हाँ और ना से, हक़ीक़त बदलते देखी बातों  का अब  मुझे, आसरा नहीं ।..

Thus Spake Kabeer 25

Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone. He also deals..

Thus Spake Kabeer 54

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कहत कबीर २७

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कहत कबीर ४१

करनी तज कथनी कथै, अज्ञानी दिन रात । ///// मन के मते न चालिए, मन के मते अनेक । कबीरदासजी संत कहे जाते हैं, पर..

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Poetry/पद्य

Let go of Worry Today

Let go of Worry Today Actions and reactionsCause and effectSufferings and HappinessA process of continuous flow Sages have shown the way Understand the impermanenceLet go

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“I will not look at another’s bowl intent on finding fault” — a training to be observed — Gautam Buddha आत्मबोध (४) “मैं किसी दूसरे

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