एक मधुर संबंध

मुंबई महानगर में, मुलुंड की एक चॉल में, एक निम्न-मध्यमवर्गीय...

Plant Care Data

In India, with the boom in economy, and resulting have...

Brahmacharya Āshram

The word Āshram means a place or stage where one...

Featured / विशेष

मेरी अज्जी और मैं — पुस्तक समर्पण

यह पुस्तक समर्पित है —– परम प्रेम और श्र्द्धा के साथ मेरी प्रिय अज्जी – डॉ. सरलादेवी खोत को, जो सदा मेरी गुरु और जीवन..

मेरी अज्जी और मैं (१४/२१)

विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..

मेरी अज्जी और मैं (६/२१)

विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..

Most read / लोकप्रिय

कबीर दास जी से प्रेरित कुछ दोहे — ३

ये दोहे श्री अनूप जलोटा के गाये हुए “कबीर दोहे” की धुन पर सजते हैं हिन्दू, बौद्ध, जैन, ईसाई, सिख तथा इस्लाम ।धर्मों के छ:..

मैडम और गंगू बाई (२)

कम्युनिकेशन प्रॉब्लम (Communication Problem) आज फिर मेज पर, गलत डिशेज़ और कटलरी थी आईदेख कर पारा चढ़ा, और मैडम जी जोर से चिल्लाईं“अरे ओ गंगू..

कहत कबीर ३८

ज्यों तिरिया पीहर बसै, सुरति रहै मन माँहि । ///// छिनहि चढ़ै छिन ऊतरै, सो तो प्रेम न होय । कबीरदासजी संत कहे जाते हैं,..

कहत कबीर १९

सोना सज्जन साधुजन, टूटे जुड़े सौ बार । // तन को जोगी सब करै, मन को करै न कोय । कबीर संत कहे जाते हैं,..

फूल की मुस्कराहट

बाग़ का फूल, अपना पराग दे कर मुरझा जाता है पूजा का फूल अपना आशीर्वाद देकर मुरझा जाता है गुलदस्ते का फूल आनंद देकर कुछ..

Thus Spake Kabeer 43

Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone. He also deals..

Prose/गद्य

उद्धरण (Quotes)

Real Knowledge (2)

To know, is to know that you know nothing. That is the meaning of true knowledge. — Socrates वास्तविक ज्ञान (२) ज्ञान का अर्थ यह

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Poetry/पद्य

कविताएँ (Poems)

“जी” नहीं कहते

दोस्त दोस्तों को “जी” नहीं कहतेगाली भी दें तो, खफा नहीं रहतेजिनके होने से खुशी हो दुगनीमुश्किल पड़े तो वो, हमसे जुदा नहीं रहते दोस्ती

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Inspirational / प्रेरक

आध्यात्मिक (Spiritual)

कहत कबीर ४१

करनी तज कथनी कथै, अज्ञानी दिन रात । ///// मन के मते न चालिए, मन के मते अनेक । कबीरदासजी संत कहे जाते हैं, पर

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