लफ़्ज़ों में क्या रखा है
कहा कुछ तुमने ?– सुना नहीं, दुआ थी या बद्दुआ, पता नही । हाँ और ना से, हक़ीक़त बदलते देखी बातों का अब मुझे, आसरा नहीं ।
प्यार और प्याज प्यार और प्याज में बहुत ज़्यादा फ़र्क़ नहीं होता, प्यार हो या प्याज, दोनों ही बेशकीमती हैं, दोनों परत-दर-परत खुलते हैं, फिर..
The word Āshram means a place or stage where one makes disciplined effort—whether for learning, service, self-growth, or spiritual practice. The Āshrama System in Hindu..
The word Āshram means a place or stage where one makes disciplined effort—whether for learning, service, self-growth, or spiritual practice. The Ashrama System in Hindu..
The word Purushārtha means human goals. In our spiritual texts, the word is also used in other senses — sometimes it refers to free will,..
The word Purushārtha means human goals. In our spiritual texts, the word is also used in other senses — sometimes it refers to free will,..
The word Purushārtha means human goals. In our spiritual texts, the word is also used in other senses — sometimes it refers to free will,..
विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..
व्यक्तिगत घटनाएँ जुड़ी वैश्विक घटनाएँ ६ जनवरी १९६३नीलिमा का जन्म (मुंबई)विवेक का जन्म (बंगलौर) ६ जनवरी १९६३वैकुंठ एकादशी १९६३ से १९६९बचपन, मुंबई में १९६९ से..
विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..
चिड़ी चोंच भरि लै गई, नदी घट्या ना नीर । ///// पानी बाढ़ै नाव में, घर में बाढ़ै दाम । कबीरदासजी संत कहे जाते हैं,..
जल में कुंभ, कुंभ में जल है, बाहर – भीतर पानी । // जाका गुरु है आँधरा, चेला है जाचंध । कबीरदास जी संत कहे..
सुख के संगी स्वारथी, दुःख में रहते दूर । ////// पहिले यह मन काग था, करता जीवन घात । कबीरदासजी संत कहे जाते हैं, पर..
लंबा मारग, दूर घर, बिकट पंथ बहु मार । ///// कबीर निर्भय राम भज, जब लगि दीवै बाति । कबीरदासजी संत कहे जाते हैं, पर..
जहाँ न जाको गुन लहै, तहाँ न ताको ठाँव । ///// हीरा तहाँ न खोलिए, जहँ खोटी है हाट । कबीरदासजी संत कहे जाते हैं,..
मन के पागलपन को देखो चंचल है यह नादां ऐसे मंदिर में पूजा में बैठा, बुनता है यह सपने कैसे महल बने इक सुंदर मेरा,..
कहा कुछ तुमने ?– सुना नहीं, दुआ थी या बद्दुआ, पता नही । हाँ और ना से, हक़ीक़त बदलते देखी बातों का अब मुझे, आसरा नहीं ।

यह दोहे श्री अनूप जलोटा के गाये हुए “कबीर दोहे” की धुन पर सजते हैं चिंता तबहू कीजिये, गर चिंता से सुख होय चिंता को तज दीजिये, मन की

A Magnificent Trade My Child! Today I wish to share with you. My love for you is Unequivocal Uninhibited Unending Unfathomable Uninterrupted Unbiased and Unconditional