वाव / बावड़ी /Step-well

मनुष्यों के अस्तित्व के लिए पानी आवश्यक है । इसलिए,...

अडालज की वाव

हमारा पहला पड़ाव था “अडालज की वाव” ।  वाव या...

गुजरात के कुछ दर्शनीय स्थल

श्री जसवंत सिंह जी बाँठिया के, 20 वीं सदी के...

Featured / विशेष

मेरी अज्जी और मैं (१८/२१)

विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..

मेरी अज्जी और मैं (२/२१)

विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..

मेरी अज्जी और मैं (१९/२१)

विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..

Most read / लोकप्रिय

कहत कबीर ३४

हिंदू कहे राम मोहि प्यारा, तुरक कहे रहिमाना । ///// हिंदू कहूँ तो मैं नहीं, मुसलमान मैं नाहिं । कबीरदासजी संत कहे जाते हैं, पर..

कहत कबीर ३२

तिनका कबहुँ न निंदिये, जो पाँयन तर होय । ///// कबिरा गरब न कीजिए,ऊँचा देखि आबास । कबीरदासजी संत कहे जाते हैं, पर इनके विचारों..

Falling in Love

The experience of falling in love is invariably temporary. —-M. Scott Peck प्यार हो जाना “प्यार हो जाने” (falling in love) का अनुभव हमेशा अस्थायी..

Today and Tomorrow (1)

The philosophy of the school room in one generation will be the philosophy of government in the next. — Abraham Lincoln आज और कल (१)..

कहत कबीर १४

माटी कहे कुम्हार से , तू क्या रौंदे मोय । // माली आवत देखि कै कलियन करी पुकार । कबीरदास जी संत कहे जाते हैं,..

Thus Spake Kabeer 26

Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone. He also deals..

Prose/गद्य

उद्धरण (Quotes)

Real Knowledge (2)

To know, is to know that you know nothing. That is the meaning of true knowledge. — Socrates वास्तविक ज्ञान (२) ज्ञान का अर्थ यह

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Poetry/पद्य

कविताएँ (Poems)

“जी” नहीं कहते

दोस्त दोस्तों को “जी” नहीं कहतेगाली भी दें तो, खफा नहीं रहतेजिनके होने से खुशी हो दुगनीमुश्किल पड़े तो वो, हमसे जुदा नहीं रहते दोस्ती

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Inspirational / प्रेरक

आध्यात्मिक (Spiritual)

कहत कबीर २०

कबीर ब्यास कथा कहै, भीतर भेदे नाहिं । // मानुस तेरा गुन बड़ा, मांस न आवे काज । कबीर संत कहे जाते हैं, पर इनके

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