
Real Knowledge (1)
Real knowledge is to know the extent of one’s ignorance. — Confucius वास्तविक ज्ञान (१) वास्तविक ज्ञान है, अपने अज्ञान की सीमा का सही सही
मनुष्यों के अस्तित्व के लिए पानी आवश्यक है । इसलिए, जैसे-जैसे मानव जाति खानाबदोश “शिकार-संग्रह” जीवन शैली से “कृषिवाद” तक आगे बढ़ी, उन्होंने एक स्थान..
हमारा पहला पड़ाव था “अडालज की वाव” । वाव या बावड़ी या, अंग्रेज़ी में, Stepwell, का इतिहास बहुत पुराना है । पानी को संचय करनेवाली..
श्री जसवंत सिंह जी बाँठिया के, 20 वीं सदी के मध्य में जन्मे पौत्र-पौत्रियाँ, अपने जीवन के ८ वें / ९ वें दशक में पहुँच..
कहा कुछ तुमने ?– सुना नहीं, दुआ थी या बद्दुआ, पता नही । हाँ और ना से, हक़ीक़त बदलते देखी बातों का अब मुझे, आसरा नहीं ।..
बचपन में हम एक छोटी सी औद्योगिक बसाहट में रहते थे – तीन बँगले, ८-१० क्वार्टर, मजदूरों की बस्ती, एक डिस्पेंसरी और बैरकनुमा ऑफिसों के..
विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..
विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..
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Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone. He also deals..
जल में कुंभ, कुंभ में जल है, बाहर – भीतर पानी । // जाका गुरु है आँधरा, चेला है जाचंध । कबीरदास जी संत कहे..
मेरी जन्नत तो यहीं है मेरी जन्नत तो यहीं हैजन्नत में क्या है, जहन्नुम में क्या हैमुझे न तो ख़बर है, न ही परवाह या..
सपने और यादें तेरी यादें कभी मेरे जहन से जाती ही नहींतेरे सपने मेरी आँखों से कभी टलते ही नहींमैं तो उलझ जाता हूँ ये..
Two things are infinite: the universe and human stupidity; and I’m not sure about the Universe. — Albert Einstein मानव की मूर्खता दो चीजें अनंत..
I am 4, frail and tired, lost my wayWandering through the bomb blast, I walked awayMy home, pray tell, how far is it?Left or right..

Real knowledge is to know the extent of one’s ignorance. — Confucius वास्तविक ज्ञान (१) वास्तविक ज्ञान है, अपने अज्ञान की सीमा का सही सही

कबीर ब्यास कथा कहै, भीतर भेदे नाहिं । // मानुस तेरा गुन बड़ा, मांस न आवे काज । कबीर संत कहे जाते हैं, पर इनके

आज और कल (२) भविष्य का निर्धारण इससे होता है कि आप आज क्या कर रहे हैं । — महात्मा गाँधी Today and Tomorrow (2)