गुजरात के कुछ दर्शनीय स्थल

श्री जसवंत सिंह जी बाँठिया के, 20 वीं सदी के मध्य में जन्मे पौत्र-पौत्रियाँ, अपने जीवन के ८ वें / ९ वें दशक में पहुँच चुके हैं ।  इनमें से ज्यादाहतर का बचपन और युवावस्था कलकत्ता में ही बीता, जहां एक दूसरे से मिलना नियमित रूप से हो जाता था ।  आज परिस्थितियोंवश ये सब अलग-अलग शहरों में रहते हैं और उम्र का तक़ाज़ा है कि ऐसा मिलना-जुलना दुर्लभ हो गया है ।  तो इस साल, सभी ने यह तय किया कि इस साल राखी के त्योहार पर सब २-३- दिन के लिए एक शहर में मिलें और उन पुरानी यादों को ताज़ा करें ।  कई लोगों की निरंतर मेहनत और चेष्टा फल लाई और हम राखी मनाने के लिए अहमदाबाद में इकठ्ठा हुए ।

गुजरात का सामाजिक और राजनैतिक इतिहास काफी पुराना है ।  पुरातन काल के मंदिर, इमारतें, जल-प्रबंध की योजनाएँ अपनी कला, वास्तुविद्या, वैज्ञानिक जानकारी के लिए विश्व में मशहूर हैं ।  क्यों कि बढ़ती उम्र के साथ भ्रमण मुश्किल होता जत्था है इसलिए कुछ लोगों ने “बहती गंगा में हाथ धोने” का निश्चय किया ।  राखी के कार्यक्रम को प्राथमिकता देते हुए हमने अहमदाबाद के आस-पास ऐसी कुछ विख्यात जगहों को देखने का कार्यक्रम बनाया ।  यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि यह निर्णय एक बहुत अच्छा निर्णय निकला — केवल मौज-मस्ती के लिए ही नहीं बल्कि ज्ञानार्जन के लिए भी ।  उन पुरावशेषों की परिकल्पना, योजना और निर्माण के बारे में जानकर इन निर्माणों से जुड़े समाज के ज्ञान, कल्पना और कारीगरी पर अचंभा और गर्व होता है ।  इस पोस्ट में कुछ विश्व में ख्यातिप्राप्त पुरवाशेषों का वर्णन दिया गया है ।  इन वर्णनों का आनंद उठाएँ । इन पर आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी ।

— विनोद बाँठिया

Image Credit: https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Map_Gujarat_state_and_districts.png

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