लफ़्ज़ों में क्या रखा है
कहा कुछ तुमने ?– सुना नहीं, दुआ थी या बद्दुआ, पता नही । हाँ और ना से, हक़ीक़त बदलते देखी बातों का अब मुझे, आसरा नहीं ।
मनुष्यों के अस्तित्व के लिए पानी आवश्यक है । इसलिए, जैसे-जैसे मानव जाति खानाबदोश “शिकार-संग्रह” जीवन शैली से “कृषिवाद” तक आगे बढ़ी, उन्होंने एक स्थान..
हमारा पहला पड़ाव था “अडालज की वाव” । वाव या बावड़ी या, अंग्रेज़ी में, Stepwell, का इतिहास बहुत पुराना है । पानी को संचय करनेवाली..
श्री जसवंत सिंह जी बाँठिया के, 20 वीं सदी के मध्य में जन्मे पौत्र-पौत्रियाँ, अपने जीवन के ८ वें / ९ वें दशक में पहुँच..
कहा कुछ तुमने ?– सुना नहीं, दुआ थी या बद्दुआ, पता नही । हाँ और ना से, हक़ीक़त बदलते देखी बातों का अब मुझे, आसरा नहीं ।..
बचपन में हम एक छोटी सी औद्योगिक बसाहट में रहते थे – तीन बँगले, ८-१० क्वार्टर, मजदूरों की बस्ती, एक डिस्पेंसरी और बैरकनुमा ऑफिसों के..
डॉ. नीलिमा कडाम्बी पेशे से एक सर्जन और स्वास्थ्यरक्षक हैं । जनकल्याण और समग्रस्वस्थता से जुड़ाव इनका केवल पेशा ही नहीं, बल्कि जुनून है ।..
विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..
मेरी जन्नत तो यहीं है मेरी जन्नत तो यहीं हैजन्नत में क्या है, जहन्नुम में क्या हैमुझे न तो ख़बर है, न ही परवाह या..
Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone. He also deals..
मैडम और गंगू बाई (४) आज सवेरे, मैडम ने डांट के बजाय, एक मुस्कान से गंगू बाई का अभिवादन कियागंगू बाई का माथा ठनका, मन..
Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone. He also deals..
सोना सज्जन साधुजन, टूटे जुड़े सौ बार । // तन को जोगी सब करै, मन को करै न कोय । कबीर संत कहे जाते हैं,..
Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone. He also deals..
कहा कुछ तुमने ?– सुना नहीं, दुआ थी या बद्दुआ, पता नही । हाँ और ना से, हक़ीक़त बदलते देखी बातों का अब मुझे, आसरा नहीं ।

Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone. He also deals
Worthless people live only to eat and drink; people of worth eat and drink only to live. — Socrates नालायक लोग केवल खाने के लिए