वाव / बावड़ी /Step-well

मनुष्यों के अस्तित्व के लिए पानी आवश्यक है । इसलिए,...

अडालज की वाव

हमारा पहला पड़ाव था “अडालज की वाव” ।  वाव या...

गुजरात के कुछ दर्शनीय स्थल

श्री जसवंत सिंह जी बाँठिया के, 20 वीं सदी के...

Featured / विशेष

मेरी अज्जी और मैं (१६/२१)

विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..

मेरी अज्जी और मैं — आभार

मैं इस पुस्तक के शोध, लेखन, संपादन और प्रकाशन के साथ मुझे प्रेरित करने और मेरी मदद करने के लिए अनेकानेक लोगों को धन्यवाद देना..

मेरी अज्जी और मैं (१७/२१)

विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..

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कहत कबीर २०

कबीर ब्यास कथा कहै, भीतर भेदे नाहिं । // मानुस तेरा गुन बड़ा, मांस न आवे काज । कबीर संत कहे जाते हैं, पर इनके..

बन्दर की पूंछ

बन्दर की पूंछ (पंचतंत्र की एक कहानी पर आधारित) बहुत दिनों पहले जंगल में, रहते थे कुछ बन्दरइधर कूदते, उधर फाँदते, खेला करते दिन भर..

A Magnificent Trade

A Magnificent Trade My Child! Today I wish to share with you. My love for you is Unequivocal Uninhibited Unending Unfathomable Uninterrupted Unbiased and Unconditional..

Thus Spake Kabeer 06

Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone.  He also deals..

तेरे ख़्वाबों की ख़ुशबू

तेरे ख़्वाबों की ख़ुशबू कोई चीज़ है, या ना चीज़ हैकोई ख़याल है या बस एक अहसास हैज़हन में बस गयी है, दिल में उतर..

मैडम और गंगू बाई (३)

मैडम और गंगू बाई (३) मैडम जी को आवाज़, उनकी शख़्सियत की तरह, दबंग मिली थीजब वह बोलतीं, तो sound meter की सूई, 80 dB..

Prose/गद्य

Be My Friend

Don’t walk behind me; I may not lead. Don’t walk in front of me; I may not follow. Just walk beside me and be my

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Poetry/पद्य

कविताएँ (Poems)

Happy Valentine’s Day

Valentine, a time to romance, Joining hands — sing and dance, Roses, chocolates, diamonds glow,Love has filled the air, I know. “Love” is essence of

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Inspirational / प्रेरक

आध्यात्मिक (Spiritual)

कहत कबीर ४४

जहाँ न जाको गुन लहै, तहाँ न ताको ठाँव । ///// हीरा तहाँ न खोलिए, जहँ खोटी है हाट । कबीरदासजी संत कहे जाते हैं,

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