Differing Perspective
Worthless people live only to eat and drink; people of worth eat and drink only to live. — Socrates नालायक लोग केवल खाने के लिए
मनुष्यों के अस्तित्व के लिए पानी आवश्यक है । इसलिए, जैसे-जैसे मानव जाति खानाबदोश “शिकार-संग्रह” जीवन शैली से “कृषिवाद” तक आगे बढ़ी, उन्होंने एक स्थान..
हमारा पहला पड़ाव था “अडालज की वाव” । वाव या बावड़ी या, अंग्रेज़ी में, Stepwell, का इतिहास बहुत पुराना है । पानी को संचय करनेवाली..
श्री जसवंत सिंह जी बाँठिया के, 20 वीं सदी के मध्य में जन्मे पौत्र-पौत्रियाँ, अपने जीवन के ८ वें / ९ वें दशक में पहुँच..
कहा कुछ तुमने ?– सुना नहीं, दुआ थी या बद्दुआ, पता नही । हाँ और ना से, हक़ीक़त बदलते देखी बातों का अब मुझे, आसरा नहीं ।..
बचपन में हम एक छोटी सी औद्योगिक बसाहट में रहते थे – तीन बँगले, ८-१० क्वार्टर, मजदूरों की बस्ती, एक डिस्पेंसरी और बैरकनुमा ऑफिसों के..
सन १८९७ में एक दरिद्र परिवार में जन्म २ वर्ष की आयु में ही पिता को खो दिया ९ वर्ष की आयु में विवाह १०..
विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..
विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..
Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone. He also deals..
Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone. He also deals..
देह खेह हो जायगी, कौन कहेगा देह । ////// कुटिल बचन नहिं बोलिये, शीतल बैन ले चीन्हि । कबीरदासजी संत कहे जाते हैं, पर इनके..
जहाँ न जाको गुन लहै, तहाँ न ताको ठाँव । ///// हीरा तहाँ न खोलिए, जहँ खोटी है हाट । कबीरदासजी संत कहे जाते हैं,..
तू मत जाने बावरै, मेरा है सब कोय । ///// आब गई, आदर गया, नैनन गया सनेह ।। कबीरदासजी संत कहे जाते हैं, पर इनके..
Worthless people live only to eat and drink; people of worth eat and drink only to live. — Socrates नालायक लोग केवल खाने के लिए

अहिंसा की शुरुआत शक था मन में ज़िंदगी, हिंसा बिना कैसे जीऊँ,कोई आए मारने तो शांति से पिटता रहूँ?धर्म ये कहता नहीं, कायर बने दुबके

कबीर के दर्शन में “प्रेम” की अवधारणा (Concept) कबीरदास जी ने प्रेम संबंधी भी कई दोहे रचे हैं किंतु उनका अर्थ समझने के लिए हमें