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मेरी उम्र लगभग 13–14 साल रही होगी जब मेरे ननिहाल में सुखदेई नाम की रसोईदारिन रहती थी । महीने दो महीने में जब भी मेरा
मनुष्यों के अस्तित्व के लिए पानी आवश्यक है । इसलिए, जैसे-जैसे मानव जाति खानाबदोश “शिकार-संग्रह” जीवन शैली से “कृषिवाद” तक आगे बढ़ी, उन्होंने एक स्थान..
हमारा पहला पड़ाव था “अडालज की वाव” । वाव या बावड़ी या, अंग्रेज़ी में, Stepwell, का इतिहास बहुत पुराना है । पानी को संचय करनेवाली..
श्री जसवंत सिंह जी बाँठिया के, 20 वीं सदी के मध्य में जन्मे पौत्र-पौत्रियाँ, अपने जीवन के ८ वें / ९ वें दशक में पहुँच..
कहा कुछ तुमने ?– सुना नहीं, दुआ थी या बद्दुआ, पता नही । हाँ और ना से, हक़ीक़त बदलते देखी बातों का अब मुझे, आसरा नहीं ।..
बचपन में हम एक छोटी सी औद्योगिक बसाहट में रहते थे – तीन बँगले, ८-१० क्वार्टर, मजदूरों की बस्ती, एक डिस्पेंसरी और बैरकनुमा ऑफिसों के..
विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..
विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..
विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..
केसन कहा बिगारिया, जो मूँड़ो सौ बार । ///// जहाँ प्रेम तहँ नेम नहिं, तहाँ न बुधि ब्यौहार । कबीरदासजी संत कहे जाते हैं, पर..
Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone. He also deals..
हिंदू कहे राम मोहि प्यारा, तुरक कहे रहिमाना । ///// हिंदू कहूँ तो मैं नहीं, मुसलमान मैं नाहिं । कबीरदासजी संत कहे जाते हैं, पर..
All self-discipline might be defined as “Teaching ourselves to do the unnatural.“ —-M. Scott Peck आत्म-अनुशासन (१) सभी तरह के आत्मानुशासन की परिभाषा हो सकती..
आनंदमयी आत्मा खुशी ढूँढती है, चलने को तत्पर जहाँ तक भी जानाआँखो ने देखी जो माया की नगरी, मन ने तड़प के कहा यह है..
Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone. He also deals..
मेरी उम्र लगभग 13–14 साल रही होगी जब मेरे ननिहाल में सुखदेई नाम की रसोईदारिन रहती थी । महीने दो महीने में जब भी मेरा

हरि गुन गावै हरषि के, हिरदय कपट न जाय । ////// बूझ सरीखी बात है, कहन सरीखी नाहिं। कबीरदासजी संत कहे जाते हैं, पर इनके

पानी मिलै न आपको, औरन बकसत क्षीर । ///// कबीर संगत साधु की ज्यौं गंधी का बास। कबीरदासजी संत कहे जाते हैं, पर इनके विचारों