भाषा – वाषा का अनोखापन
हिन्दी, और कुछ और भारतीय भाषाओं के वार्तालाप में, तुकांत शब्दों का एक अनोखा उपयोग किया जाता है । यह उपयोग वार्तालाप मे मुख्य शब्द
मनुष्यों के अस्तित्व के लिए पानी आवश्यक है । इसलिए, जैसे-जैसे मानव जाति खानाबदोश “शिकार-संग्रह” जीवन शैली से “कृषिवाद” तक आगे बढ़ी, उन्होंने एक स्थान..
हमारा पहला पड़ाव था “अडालज की वाव” । वाव या बावड़ी या, अंग्रेज़ी में, Stepwell, का इतिहास बहुत पुराना है । पानी को संचय करनेवाली..
श्री जसवंत सिंह जी बाँठिया के, 20 वीं सदी के मध्य में जन्मे पौत्र-पौत्रियाँ, अपने जीवन के ८ वें / ९ वें दशक में पहुँच..
कहा कुछ तुमने ?– सुना नहीं, दुआ थी या बद्दुआ, पता नही । हाँ और ना से, हक़ीक़त बदलते देखी बातों का अब मुझे, आसरा नहीं ।..
बचपन में हम एक छोटी सी औद्योगिक बसाहट में रहते थे – तीन बँगले, ८-१० क्वार्टर, मजदूरों की बस्ती, एक डिस्पेंसरी और बैरकनुमा ऑफिसों के..
डॉ. कुसुम बाँठिया दिल्ली में कॉलेजों तथा विश्वविद्यालय में तीस वर्ष तक हिन्दी भाषा तथा साहित्य का प्राध्यापन करने के बाद सेवानिवृत्त हुई हैं ।..
विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..
विषय सूची (लिंक्स के साथ) अध्याय १ अध्याय २ अध्याय ३ अध्याय ४ अध्याय ५ अध्याय ६ अध्याय ७ अध्याय ८ अध्याय ९ अध्याय १०..
तुरुक मसीहत देहर हिंदू, आप आप को धाय । ////// हंसा बगुला एक सा, मानसरोवर माँहि । कबीरदासजी संत कहे जाते हैं, पर इनके विचारों..
दोस्ती की नज़र कह ना पायेंगे कभी एहसान तेरा, मेरे दोस्तशुक्रिया कहने को निकले, आँख नम सी हो गयीसूरज की गर्मी से पिघले, जब मिले..
मैडम और गंगू बाई (४) आज सवेरे, मैडम ने डांट के बजाय, एक मुस्कान से गंगू बाई का अभिवादन कियागंगू बाई का माथा ठनका, मन..
करनी तज कथनी कथै, अज्ञानी दिन रात । ///// मन के मते न चालिए, मन के मते अनेक । कबीरदासजी संत कहे जाते हैं, पर..
Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone. He also deals..
हिन्दी, और कुछ और भारतीय भाषाओं के वार्तालाप में, तुकांत शब्दों का एक अनोखा उपयोग किया जाता है । यह उपयोग वार्तालाप मे मुख्य शब्द

Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone. He also deals

“I will not look at another’s bowl intent on finding fault” — a training to be observed — Gautam Buddha आत्मबोध (४) “मैं किसी दूसरे