Thus Spake Kabeer 15

Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone. He also deals with worldly life – the character and behaviour of individuals; practices (and malpractices) rampant in society; evils of caste system which divides people into ‘high’ and ‘low’ classes, etc. He […]

Thus Spake Kabeer 16

Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone.  He also deals with worldly life – the character and behaviour of individuals; practices (and malpractices) rampant in society; evils of caste system which divides people into ‘high’ and ‘low’ classes, etc.  He […]

चैन की नींद

चैन की नींद मेरा सब कुछ लेले, बस चैन की नींद का रहम कर  दौलत में चैन नहीं, इज़्ज़त में चैन नहीं रस्मों में चैन नहीं, रिवाजों  में चैन नहीं दुनिया में चैन नहीं, दुनिया से दूर चैन नहीं  सब लेले, बस चैन की नींद का रहम कर  साक़ी की नज़र ने मस्त कर डाला  […]

कहत कबीर १५

ज्यों तिल माँहीं तेल है, चकमक माँहीं आगि । // ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय । कबीरदास जी संत कहे जाते हैं, पर इनके विचारों और रचनाओं का क्षेत्र केवल धर्म, अध्यात्म, चिंतन और भजन नहीं है। उन्होंने सांसारिक जीवन — व्यक्ति के चरित्र और व्यवहार; समाज की प्रचलित प्रथाओं, व्यवहारों और अंधविश्वासों; […]

कबीर दास जी से प्रेरित कुछ दोहे — ४

यह दोहे श्री अनूप जलोटा के गाये हुए “कबीर दोहे” की धुन पर सजते हैं चिंता तबहू कीजिये, गर चिंता से सुख होय चिंता को तज दीजिये, मन की शांति  होय दान न बड़ा, न छोटा, गर उसमे नाम नहीं गर दान दे नाम माँगे, तो व्यापार है, दान नहीं  कबीरा हांडी प्रेम की, कभी नहीं भर पाएप्रेम की इतनी […]

कहत कबीर १६

गुरु कुम्हार सिख कुंभ है, गढ़ि गढ़ि काढ़े खोट । // काल करै सो आज कर, आज करै सो अब्ब । कबीरदास जी संत कहे जाते हैं, पर इनके विचारों और रचनाओं का क्षेत्र केवल धर्म, अध्यात्म, चिंतन और भजन नहीं है। उन्होंने सांसारिक जीवन — व्यक्ति के चरित्र और व्यवहार; समाज की प्रचलित प्रथाओं, […]

Thus Spake Kabeer 14

Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone. He also deals with worldly life – the character and behaviour of individuals; practices (and malpractices) rampant in society; evils of caste system which divides people into ‘high’ and ‘low’ classes, etc. He […]

तो मज़ा नहीं

तो मज़ा नहीं गर ज़िंदगी में ग़म ही ग़मआँखें नम ही नम होंतो मज़ा नहीं ग़र ज़िन्दगी में मौजां इ मौजां होंहोठों पर मुस्कान ही मुस्कान होतो मज़ा नहीं मुसर्रत — आनद, ख़ुशी ज़िंदगी में भी दर्द हो,मुसर्रत हो, वरना ज़िंदगी कातो मज़ा नहीं कमसिन — अवयस्कलबरेज़ — लबालब भरा हुआ साक़ी अगर कमसिन ना […]

कहत कबीर १४

माटी कहे कुम्हार से , तू क्या रौंदे मोय । // माली आवत देखि कै कलियन करी पुकार । कबीरदास जी संत कहे जाते हैं, पर इनके विचारों और रचनाओं का क्षेत्र केवल धर्म, अध्यात्म, चिंतन और भजन नहीं है। उन्होंने सांसारिक जीवन — व्यक्ति के चरित्र और व्यवहार; समाज की प्रचलित प्रथाओं, व्यवहारों और […]

कहत कबीर १३

साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय । // जाति न पूछो साधु की , पूछ लीजिए ज्ञान । कबीरदास जी संत कहे जाते हैं, पर इनके विचारों और रचनाओं का क्षेत्र केवल धर्म, अध्यात्म, चिंतन और भजन नहीं है। उन्होंने सांसारिक जीवन — व्यक्ति के चरित्र और व्यवहार; समाज की प्रचलित प्रथाओं, व्यवहारों और अंधविश्वासों; […]