कहत कबीर १३

साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय । // जाति न पूछो साधु की , पूछ लीजिए ज्ञान । कबीरदास जी संत कहे जाते हैं, पर इनके विचारों और रचनाओं का क्षेत्र केवल धर्म, अध्यात्म, चिंतन और भजन नहीं है। उन्होंने सांसारिक जीवन — व्यक्ति के चरित्र और व्यवहार; समाज की प्रचलित प्रथाओं, व्यवहारों और अंधविश्वासों; […]
Thus Spake Kabeer 12

Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone. He also deals with worldly life – the character and behaviour of individuals; practices (and malpractices) rampant in society; evils of caste system which divides people into ‘high’ and ‘low’ classes, etc. He […]
Thus Spake Kabeer 13

Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone. He also deals with worldly life – the character and behaviour of individuals; practices (and malpractices) rampant in society; evils of caste system which divides people into ‘high’ and ‘low’ classes, etc. He […]
मैडम और गंगू बाई (३)

मैडम और गंगू बाई (३) मैडम जी को आवाज़, उनकी शख़्सियत की तरह, दबंग मिली थीजब वह बोलतीं, तो sound meter की सूई, 80 dB के पार होती थी जिसे फोन किया उसके घर में, बिना स्पीकर फोन के, वार्तालाप सबको सुनाई पड़ता थाकइयों के कई बार, धीरे बोलने के सुझावों का, उन पर कोई […]
कहत कबीर १२

गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूँ पाय । // यह तन विष की बेलरी, गुरु अमृत की खान । कबीरदास जी संत कहे जाते हैं, पर इनके विचारों और रचनाओं का क्षेत्र केवल धर्म, अध्यात्म, चिंतन और भजन नहीं है। उन्होंने सांसारिक जीवन — व्यक्ति के चरित्र और व्यवहार; समाज की प्रचलित प्रथाओं, व्यवहारों और […]
चेहरे

चेहरे हमारी भावनाएँनन्हे शिशुओं की तरह खेलती रहती हैंमन के धूल भरे आँगन में हाथ-पैर लिथड़ जाते हैं धूल मेंकपड़ों पर फैल जाती है गंदगीऔर अँगनाई के कच्चे कोने की मिट्टीलार में लिपट करबन जाती है गालों का चंदन परजब कोई उन्हें देखने आता है –या हम ही उन्हें किसी को दिखलाने जाते हैंतो चटपट […]
कहत कबीर ११

माया मुई न मन मुआ, मर मर गया सरीर । // चलती चाकी देखकर, दिया कबीर रोय । कबीरदास जी संत कहे जाते हैं, पर इनके विचारों और रचनाओं का क्षेत्र केवल धर्म, अध्यात्म, चिंतन और भजन नहीं है। उन्होंने सांसारिक जीवन — व्यक्ति के चरित्र और व्यवहार; समाज की प्रचलित प्रथाओं, व्यवहारों और अंधविश्वासों; […]
तेरे ख़्वाबों की ख़ुशबू
तेरे ख़्वाबों की ख़ुशबू कोई चीज़ है, या ना चीज़ हैकोई ख़याल है या बस एक अहसास हैज़हन में बस गयी है, दिल में उतर गयी हैमेरी आरज़ू है कि बस, तू आरज़ी ना होती अहसास- — भावना,ज़हन — दिमाग,आरज़ू — इच्छा,आरज़ी — अस्थिर , क्षणिक दुआ –प्रार्थना,याददाश्त — याद, स्मृतिजुर्रत — हिम्मत गर आरज़ी […]
Thus Spake Kabeer 11

Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone. He also deals with worldly life – the character and behaviour of individuals; practices (and malpractices) rampant in society; evils of caste system which divides people into ‘high’ and ‘low’ classes, etc. He […]
कहत कबीर ०९

ऊँचे कुल में जामिया, करनी ऊँच न होय । // करता था सो क्यों किया, अब कर क्यों पछिताय । कबीरदास जी संत कहे जाते हैं, पर इनके विचारों और रचनाओं का क्षेत्र केवल धर्म, अध्यात्म, चिंतन और भजन नहीं है। उन्होंने सांसारिक जीवन — व्यक्ति के चरित्र और व्यवहार; समाज की प्रचलित प्रथाओं, व्यवहारों […]