मेरी अज्जी और मैं — पुस्तक समर्पण

यह पुस्तक समर्पित है —–

परम प्रेम और श्र्द्धा के साथ मेरी प्रिय अज्जी – डॉ. सरलादेवी खोत को, जो सदा मेरी गुरु और जीवन में मेरी आदर्श रही हैं

और

मेरी प्यारी माँ – श्रीमती हेमलता खोत को, जो जीवन में सदा मेरी दोस्त, संदर्शिका और मार्गदर्शक रही हैं और मुझ पर जिनका विश्वास कभी मंद नहीं पड़ा

और

मेरी बहुत ही प्यारी बिटिया – पूजा कडाम्बी को, जिसने मेरे जीवन को ख़ुशियों से भर दिया और जिसमें मैं वही ऊर्जा, चमक और दृढ़ संकल्प देख रही हूँ, जो उसकी परनानी में थे

और

आप सभी अद्भुत, अपूर्व महिलाओं (बहनों और प्यारी सखियों) को जिन्होंने मेरे जीवन को गति दी है, आगे बढ़ाया है, इसे समृद्ध और इतना सार्थक बनाया है

और अंत में

परम कृतज्ञता के साथ, अपने परिवार के सभी अद्भुत पुरुषों — मेरे तात्या (डॉ. गोपालराव खोत), मेरे बाबा (डॉ. चंद्रकांत खोत), मेरे प्रिय ओके काका (डॉ. पी. डी. देशपांडे) और सदा मुझे सहायता देने को तत्पर मेरे पति (डॉ. विवेक कडाम्बी) को, जिनके अतुलनीय योगदान ने मेरे जीवन को इतना समृद्ध बनाया है ।

— नीलिमा कडाम्बी

वाव / बावड़ी /Step-well

मनुष्यों के अस्तित्व के लिए पानी आवश्यक है । इसलिए, जैसे-जैसे मानव जाति खानाबदोश “शिकार-संग्रह” जीवन शैली से “कृषिवाद” तक आगे बढ़ी, उन्होंने एक स्थान

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गद्य (Prose)

अडालज की वाव

हमारा पहला पड़ाव था “अडालज की वाव” ।  वाव या बावड़ी या, अंग्रेज़ी में, Stepwell, का इतिहास बहुत पुराना है ।  पानी को संचय करनेवाली

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