मेरी अज्जी और मैं — आभार

मैं इस पुस्तक के शोध, लेखन, संपादन और प्रकाशन के साथ मुझे प्रेरित करने और मेरी मदद करने के लिए अनेकानेक लोगों को धन्यवाद देना चाहती हूं।  पिछले कुछ वर्षों में उनके प्रोत्साहन और समर्थन ने इस पुस्तक को एक वास्तविकता बना दिया है ।

श्रीमती कमल खोत, श्रीमती लीला दशेपांडे, श्रीमती कुंदाताई नेने, डॉ. पी. डी. देशपांडे, अशोक डे, श्रीमती सी. ऐस. लक्ष्मी, सुश्री मिनी वैद, सुश्री अश्विनी जांबोटकर, श्रीमती सुमति कानिटकर, डॉ. लक्ष्मी डे, श्रीमती वीणा फणसलकर, मेरी संपादक सुश्री सायोनी बसु, पुस्तक प्रचार को संभालने के लिए अबोली जोशी और गौरिका सिंघल, ऑथर्स अपफ्रंट के मेरे प्रकाशक मनीष पुरोहित और सुश्री सामंथा सिरोही को पुस्तक के प्रचार के लिए ।

— नीलिमा कडाम्बी

वाव / बावड़ी /Step-well

मनुष्यों के अस्तित्व के लिए पानी आवश्यक है । इसलिए, जैसे-जैसे मानव जाति खानाबदोश “शिकार-संग्रह” जीवन शैली से “कृषिवाद” तक आगे बढ़ी, उन्होंने एक स्थान

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गद्य (Prose)

अडालज की वाव

हमारा पहला पड़ाव था “अडालज की वाव” ।  वाव या बावड़ी या, अंग्रेज़ी में, Stepwell, का इतिहास बहुत पुराना है ।  पानी को संचय करनेवाली

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