डॉ. कुसुम बाँठिया दिल्ली में कॉलेजों तथा विश्वविद्यालय में तीस वर्ष तक हिन्दी भाषा तथा साहित्य का प्राध्यापन करने के बाद सेवानिवृत्त हुई हैं । शोध, पाठन-पाठन, तथा आलोचना संबन्धी लेखन के अलावा इन्होने बड़े पैमाने पर अनुवाद कार्य भी किया है । बांग्ला और अंग्रेज़ी से ये बड़ी संख्या में कहानी-उपन्यासों के अलावा साहित्य, समाजशास्त्र, इतिहास, जीवनी और अन्य विषयों से जुड़े लेखों आदि का भी हिंदी अनुवाद करती रही हैं।
वाव / बावड़ी /Step-well
मनुष्यों के अस्तित्व के लिए पानी आवश्यक है । इसलिए, जैसे-जैसे मानव जाति खानाबदोश “शिकार-संग्रह” जीवन शैली से “कृषिवाद” तक आगे बढ़ी, उन्होंने एक स्थान
