कबीर दास जी से प्रेरित कुछ दोहे — १

यह दोहे श्री अनूप जलोटा के गाये हुए  “कबीर  दोहे” की धुन पर सजते हैं

Ego को न बढ़ाइए, Ego में है दोष 
जो Ego को कम करे, उसे मिले संतोष

मानुष ऐसा चाहिए, प्रेम से हो भरपूर 
सेवा सब की जो करे, रहे अहम् से दूर 

“कबिरा” नगरी प्रेम की, उसमे तेरा वास 
उस नगरी के द्वार पर, लिखा है “कर विश्वास”

— राम बजाज

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वाव / बावड़ी /Step-well

मनुष्यों के अस्तित्व के लिए पानी आवश्यक है । इसलिए, जैसे-जैसे मानव जाति खानाबदोश “शिकार-संग्रह” जीवन शैली से “कृषिवाद” तक आगे बढ़ी, उन्होंने एक स्थान

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गद्य (Prose)

अडालज की वाव

हमारा पहला पड़ाव था “अडालज की वाव” ।  वाव या बावड़ी या, अंग्रेज़ी में, Stepwell, का इतिहास बहुत पुराना है ।  पानी को संचय करनेवाली

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