चाय स्तुति

चाय स्तुति

जय जय चाय माता, जय जय जय चाय माता
पृथ्वी की तू अमृत, पृथ्वी की तू अमृत
पूजूं तुझे माता, जय जय जय चाय माता

चैन तू देती है सबको, मात, पिता, भ्राता
चाहे हो वह लंबा, या चाहे हो छोटा
गोरा या काला, जय जय जय चाय माता

तुझ को पी के माता, सिर दर्द चला जाता
दिल का दर्द भी थोड़ा, मन का दर्द भी थोड़ा
सहनीय बन जाता जय जय जय चाय माता

तू है बड़ी दयामय, भेद नहीं करती
साथी हो या दुश्मन, नौकर हो या मालिक
सबको खुश करती, जय जय चाय माता

मैया ने मुझे जन्मा, थोड़े दिन पाला
छोड़ दिया इस जग में, त्याग दिया मुझको जब
तू ने ही पाला, जय जय चाय माता

तू है इतनी प्यारी, मित्रों को भाती
One by two मैं करता, One by four मैं करता
उफ़ भी नहीं करती, जय जय चाय माता

जब मैं तुझे सजाता, आनंद आ जाता
दूध, इलाइची, शक्कर, अदरख उसके ऊपर
अर्पण में करता, जय जय चाय माता

तू है परम दयामय, सब तुझको प्यारे
शक्कर हो स्प्लेंडा, इक्वल हो या स्टेविया
सब तुझमें रमते, जय जय चाय माता

— राम बजाज

Image Credit: https://pixabay.com/vectors/cup-teacup-tea-hot-porcelain-309641/
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