Colors of Love

Colors of Love I walked through a park, one quiet summer day,I was a tad down, and needed to get away.So suddenly I noticed, the colorful butterflyStealing nectar from the flowers, before leaping in the skyOrange, yellow, purple, pink rows of flowers tallEach color more dazzling, in this nature’s mall The garden ——————- Colors are […]
पीना तो बनता है

पीना तो बनता है नयी सहर हो गयी, पीना तो बनता हैखुदा का नाम लिया, पीना तो बनता है सहर — सुबह नाश्ते की डकार के बाद, पीना तो बनता हैखाने के पहले बोतल से, पीना तो बनता है खाने के साथ एक गिलास से, पीना तो बनता हैखाना हज़म करने के लिए, पीना तो […]
सर्जन का संगीत
सर्जन का संगीत धरती पर झरते रहते हैं बीज निरंतरकितने उनमें वृक्ष घनेरे/नन्हे पौधे बन पाते हैं?उन्हें चाहिए क्षिति-जल-पावक-गगन-समीरण —धरती — जो अपनी गोदी में उन्हें सँजोए;जल उनको जीवन रस दे; पावक दे ऊर्जा;दिशा-दिशा में बढ़ने को अवकाश गगन दे;सक्रियता दे पवन उन्हें जीवंत बनाए — पर इतना पाने पर भी क्या सारे बीयेलहर-बहर ऊँचे […]
कहत कबीर ०१

दोस पराए देख करि, चलत हसन्त हसन्त । // दीन, गरीबी, बंदगी, सब सों आदर भाव । कबीरदास जी संत कहे जाते हैं, पर इनके विचारों और रचनाओं का क्षेत्र केवल धर्म, अध्यात्म, चिंतन और भजन नहीं है। उन्होंने सांसारिक जीवन — व्यक्ति के चरित्र और व्यवहार; समाज की प्रचलित प्रथाओं, व्यवहारों और अंधविश्वासों; समाज […]
कहत कबीर ०२

निन्दक नियरे राखिये, आँगन कुटी, छवाय । // जहाँ दया तहाँ धर्म है, जहाँ लोभ तहाँ पाप । कबीरदास जी संत कहे जाते हैं, पर इनके विचारों और रचनाओं का क्षेत्र केवल धर्म, अध्यात्म, चिंतन और भजन नहीं है। उन्होंने सांसारिक जीवन — व्यक्ति के चरित्र और व्यवहार; समाज की प्रचलित प्रथाओं, व्यवहारों और अंधविश्वासों; […]
बन्दर की पूंछ

बन्दर की पूंछ (पंचतंत्र की एक कहानी पर आधारित) बहुत दिनों पहले जंगल में, रहते थे कुछ बन्दरइधर कूदते, उधर फाँदते, खेला करते दिन भर इसी झुण्ड मे था इक बन्दर, चंचल और शैतानइसे छेड़ना, उसे तोड़ना, यही था उसका काम एक दोपहर, वह सब बन्दर, पहुंचे एक जगह परकारीगर कुछ, बना रहे थे, एक […]
कबीर दास जी से प्रेरित कुछ दोहे — १

यह दोहे श्री अनूप जलोटा के गाये हुए “कबीर दोहे” की धुन पर सजते हैं Ego को न बढ़ाइए, Ego में है दोष जो Ego को कम करे, उसे मिले संतोष मानुष ऐसा चाहिए, प्रेम से हो भरपूर सेवा सब की जो करे, रहे अहम् से दूर “कबिरा” नगरी प्रेम की, उसमे तेरा वास उस नगरी के द्वार पर, लिखा है “कर विश्वास” — राम बजाज Image Credits: https://www.tentaran.com/happy-kabir-das-jayanti-wishes-status-images/
कहत कबीर ०४

बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर । // काम क्रोध मद लोभ की, जब लग घट में खानि । कबीरदास जी संत कहे जाते हैं, पर इनके विचारों और रचनाओं का क्षेत्र केवल धर्म, अध्यात्म, चिंतन और भजन नहीं है। उन्होंने सांसारिक जीवन — व्यक्ति के चरित्र और व्यवहार; समाज की प्रचलित प्रथाओं, […]
कहत कबीर ०३

ऊँचे पानी ना टिकै, नीचे ही ठहराय । // बुरा जो देखन मैं चला , बुरा न मिलिया कोय । ऊँचे पानी ना टिकै, नीचे ही ठहराय//बुरा जो देखन मैं चला , बुरा न मिलिया कोय// कबीरदास जी संत कहे जाते हैं, पर इनके विचारों और रचनाओं का क्षेत्र केवल धर्म, अध्यात्म, चिंतन और भजन […]