तनहाई और ख़ामोशी

तनहाई और ख़ामोशी तनहाई में ख़ामोशी ही साथ देती है, ख़ामोशी मे तनहाई समा जाती है रूह और दिल तो ख़ामोश रहते हैं, पर नींद और ख़्वाब तनाज़ा करते हैं . . तनाज़ा — संघर्ष ख़ामोश दिल का है प्यार ऐसा, गहराइयों के इज़हार जैसी ख़ामोशी सिर्फ़ लब पर ऐसी, रूह की पाक नज़र जैसी  ख़ामोशी […]

ये ज़रूरी तो नहीं

हम आपके आशिक हैं, दीवाने हैंआप हमको भी चाहें, ये ज़रूरी तो नहीं साक़ी पर हम मरते हैं, साक़िया देख कर जी भरते हैंसाक़ी की नज़र भी हम पर पड़े, ये ज़रूरी तो नहीं . साक़ी , साक़िया — शराब पिलनेवाला आप दुनिया में मशहूर हैं, आमफहम हैंदुनिया हमारी परवाह भी करे, ये ज़रूरी तो […]

सुशीला की कहानी (३)

सुशीला की कहानी (३) राम बजाज दो वर्षों की कड़ी मेहनत और लगाव से पढ़ाई करने के बाद, अक्षय ने २०१७ में UPMSP (उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद्) से इंटरमीडिएट (१२ वीं) की परीक्षा पास कर ली । उसे Biology और Math में डिस्टिंक्शन मिले और पूरे प्रान्त में ५८ वां स्थान प्राप्त हुआ । […]

कबीर दास जी से प्रेरित कुछ दोहे — ४

यह दोहे श्री अनूप जलोटा के गाये हुए “कबीर दोहे” की धुन पर सजते हैं चिंता तबहू कीजिये, गर चिंता से सुख होय चिंता को तज दीजिये, मन की शांति  होय दान न बड़ा, न छोटा, गर उसमे नाम नहीं गर दान दे नाम माँगे, तो व्यापार है, दान नहीं  कबीरा हांडी प्रेम की, कभी नहीं भर पाएप्रेम की इतनी […]

आज सोचा तो आँसू भर आए (२)

(“हँसते जख्म” के गाने आज सोचा तो आँसू भर आए की तर्ज़ पर ) मधुमेह से प्रभावित (Diabetic) व्यक्तियों के लिए आज सोचा तो आँसू भर आएमुद्दतें हो गयीं मीठा खाए रोज़ रोज़ मुझे ये तड़पाएनज़रों से और ख़ुशबू से रुलाए हाथ जैसे उठे उसको खानेहोश और हवास डगमगाए एक आख़िरी ख़्वाहिश है मेरीमुझको सपनों […]

चैन की नींद

चैन की नींद मेरा सब कुछ लेले, बस चैन की नींद का रहम कर  दौलत में चैन नहीं, इज़्ज़त में चैन नहीं रस्मों में चैन नहीं, रिवाजों  में चैन नहीं दुनिया में चैन नहीं, दुनिया से दूर चैन नहीं  सब लेले, बस चैन की नींद का रहम कर  साक़ी की नज़र ने मस्त कर डाला  […]

Raksh

Babuji’s real name was Narendra Kumar Srivastava. He was a retired District Bank Manager of Allahabad Bank and was last assigned with the headquarters of the Bank in Gandhi Nagar on Geeta Press Rd. Gorakhpur. He got his nickname of Babuji when he was just a clerk starting his job with the Bank on Alphonso […]

तो मज़ा नहीं

तो मज़ा नहीं गर ज़िंदगी में ग़म ही ग़मआँखें नम ही नम होंतो मज़ा नहीं ग़र ज़िन्दगी में मौजां इ मौजां होंहोठों पर मुस्कान ही मुस्कान होतो मज़ा नहीं मुसर्रत — आनद, ख़ुशी ज़िंदगी में भी दर्द हो,मुसर्रत हो, वरना ज़िंदगी कातो मज़ा नहीं कमसिन — अवयस्कलबरेज़ — लबालब भरा हुआ साक़ी अगर कमसिन ना […]

Why Amar Celebrates Christmas

Why Amar Celebrates Christmas Once at school lunch time, Amar 11, was talking with his fellow student George who was also eleven. They were both fifth grade students at middle school in Arlington, VA, a cosmopolitan suburb of Washington, D.C., where both lived. This was just small talk about what Amar did over the weekend […]

सुशीला की कहानी (२)

सुशीला की कहानी (२) राम बजाज कुछ ऐसे पड़ोसी, और “मित्र कहलाने वाले,” तो थे ही जो उसकी तपस्या से थोड़ा जलते थे । वह उससे कई व्यक्तिगत और कष्टप्रद प्रश्न करते, जिससे उसको बहुत घृणा और बेचैनी होती थी । उसके कुछ “मित्र” उससे कभी-कभी कहते – तुम तो अभी भी जवान हो तो […]