मेरी जन्नत तो यहीं है
मेरी जन्नत तो यहीं है
जन्नत में क्या है, जहन्नुम में क्या है
मुझे न तो ख़बर है, न ही परवाह या फ़िक्र
क्योंकि मेरी जन्नत तो यहीं है
जन्नत — स्वर्ग, जहन्नुम — नरक
जन्नत न तो आशियाना है, न ठिकाना है
जन्नत न तो महल है, ना ही बागे-बहार
जन्नत तो अहसासों का मेला है
मै कहता हूँ, मेरी जन्नत तो यहीं है
आशियाना — घर, अहसासों — भावों, आभासों
जब एक नन्हा सा बच्चा मुस्कराता है
जब खिलखिलाता है, बतियाता है, गुनगुनाता है
वो तो ऐसे दिल को छूता है जैसे जन्नत हो
मैं कहता हूँ, मेरी जन्नत तो यहीं है
जब नन्हें बच्चे दादा-नाना पुकार कर गले लग जाते हैं,
जब छोड़ते नहीं, कहते हैं, I Love you, दादा, नाना
जब कहते हैं उनके सपनों में हम आते हैं
मैं कहता हूँ, मेरी जन्नत तो यहीं है
जब एक दोस्त सच्चे प्यार से गले लगता है
जब एक पड़ोसी दूर से ही बंदगी करता है
जब एक अजनबी मुस्करा कर साथ चलता है
मैं कहता हूँ, मेरी जन्नत तो यहीं है
बंदगी — सलाम
जब एक शेर, एक ग़ज़ल, एक नग़मा कोई गाता है
जब एक कहानी, एक दास्ताँ, एक ईजाद सुनता हूँ
जब एक रंगे emoji, एक नक़्श, एक तस्वीर देखता हूँ
मैं कहता हूँ, मेरी जन्नत तो यहीं है
ईजाद — कुछ नया
गर अपनी चहेती शै की तमन्ना हो
माशूक़ा के पहलू का ख़्वाब हो
साक़ी की मस्त मय का ख़याल हो
मैं कहता हूँ, मेरी जन्नत तो यहीं है
शै — वस्तु, तमन्ना — इच्छा, माशूक़ा — प्रेमिका, पहलू — आंचल, ख़्वाब — सपना, साक़ी — शराब पिलानेवाली, मय — शराब
मैं कौन हूँ कहाँ हूँ, कुछ ख़बर नहीं
ज़िंदगी का मक़सद क्या है,क्यों है,कुछ पता नहीं
बस वक्त के इंतज़ार में भी यारों
मैं कहता हूँ, मेरी जन्नत तो यहीं है
मक़सद — लक्ष्य
मैं कारवाँ के साथ हूँ,कारवाँ कशमकश मे चले
दोस्त यारों के साथ हूँ,अहलो अयाल का लाड़ रहे
मंज़िल का ख़्वाब हो,मंज़िल चाहे मिले ना मिले
मैं कहता हूँ मेरी जन्नत तो यहीं है
कशमकश — दुविधा, अयाल — परिवार
अम्माँ के हाथों बनी दाल,गरम गरम रोटी
रहमत से बनाए,लाड़ से दुआ दे खिलाए
बेनक़स क़ुरबानी करती हुआ माँ का प्यार
मैं कहता हूँ मेरी जन्नत तो यहीं है
रहमत — दया, बेनक़स — निस्वार्थ, क़ुरबानी — त्याग
— राम बजाज
