मन का पागलपन

मन के पागलपन को देखो चंचल है यह नादां ऐसे मंदिर में पूजा में बैठा, बुनता है यह सपने कैसे महल बने इक सुंदर मेरा, धन दौलत इतनी मिल जाए मेरी जीवन-बगिया महके, हर पल फूलों से खिल जाए शोहरत इज़्ज़त, मान का धन भी, मिले मुझीको ज़्यादा सबसे छोटी सी यह आस लिए मैं, […]

आनंद का ठिकाना

आनंदमयी आत्मा खुशी ढूँढती है, चलने को तत्पर जहाँ तक भी जानाआँखो ने देखी जो माया की नगरी, मन ने तड़प के कहा यह है पाना,बुद्धि कहे आनंद धन-दौलत, ना पाए तू जब तक मिलेगी ना मंज़िल,बड़ा सा महल ना बनाए तू जब तक, खुशी का मिलेगा ना तुझको ठिकाना महल भी हो ऐसा बड़ा […]