मेरी अज्जी और मैं — अनुवाद की कहानी

अनुवाद मेरा शौक़ — मेरी हॉबी है । मैं केवल छपने के लिए ही नहीं, मन बहलाने के लिए भी अनुवाद करती रही हूँ । मेरी माँ श्रीमती स्वरूप कुमारी बाँठिया (अम्मा) को पत्र-पत्रिकाएँ और किताबें पढ़ना बहुत प्रिय था और हिंदी तथा गुजराती भाषा में उन्होंने केवल सामान्य कथा-कहानी ही नहीं, क्लासिक और गंभीर […]
मेरी अज्जी और मैं — आभार

मैं इस पुस्तक के शोध, लेखन, संपादन और प्रकाशन के साथ मुझे प्रेरित करने और मेरी मदद करने के लिए अनेकानेक लोगों को धन्यवाद देना चाहती हूं। पिछले कुछ वर्षों में उनके प्रोत्साहन और समर्थन ने इस पुस्तक को एक वास्तविकता बना दिया है । श्रीमती कमल खोत, श्रीमती लीला दशेपांडे, श्रीमती कुंदाताई नेने, डॉ. […]
मेरी अज्जी और मैं — पुस्तक समर्पण

यह पुस्तक समर्पित है —– परम प्रेम और श्र्द्धा के साथ मेरी प्रिय अज्जी – डॉ. सरलादेवी खोत को, जो सदा मेरी गुरु और जीवन में मेरी आदर्श रही हैं और मेरी प्यारी माँ – श्रीमती हेमलता खोत को, जो जीवन में सदा मेरी दोस्त, संदर्शिका और मार्गदर्शक रही हैं और मुझ पर जिनका विश्वास […]
मेरी अज्जी और मैं — वंश वृक्ष
फोन कहाँ गया?

फोन कहाँ गया? पिछले हफ्ते रविवार को मैं, अपनी पत्नी के साथ, मॉल गया । वहाँ पर ३-४ घंटे ख़रीदारी के बाद बढ़िया डिनर खाया और थके मांदे जब हम बाहर निकले तो काफ़ी देर तक पार्किंग लॉट में गाड़ी नहीं मिली । खैर, तीन-चार चक्कर लगाने के बाद आख़िर गाड़ी ही मिल गई । […]
Reservation in Heaven
Reservation in Heaven हिन्दी में पढ़िये There lived a couple in a big city. The husband was very cheerful but the wife was a shrew. She used to curse and abuse him on small things. The husband tried to calm his wife, but she did not listen to anything and their quarrel did not stop. […]
जन्नत का रिज़र्वेशन
जन्नत का रिज़र्वेशन Read in English एक बड़े शहर में एक मियाँ-बीवी रहते थे । मियाँ जी बड़े ख़ुशमिज़ाज थे लेकिन बीवी खूसट और बहुत झगड़ालू थी । छोटी-छोटी बातों पर वह बेमतलब् मियाँ जी को कोसती और भला-बुरा कहती थी । मियाँ जी अपनी बीवी को शांत करने की कोशिश करते, लेकिन वो कोई […]
उलझन

उलझन जब मुझे यह पता चला की एक नई वेबसाइट का निर्माण हुआ है जिसका नाम है यू क्रिएटऑनलाइन (youcreateonline.com), और मैं भी इसके लिए कुछ लिख सकती हूं तो मेरी खुशी का ठिकाना ना रहा । मैंने सोचा क्या लिखूं मन में आया क्यों ना एक कहानी लिखूं । फिर सोचा “अरे नहीं कहानी […]
दोस्त, दोस्त ना रहा

Read in English जीवन में हम कई लोगों से मिलते हैं, प्रत्येक की अपनी विलक्षणता होती है – आदतें, क्रियाएँ, विचार, जो समाज में “अपेक्षित” से अलग होते हैं । इनकी अभिव्यक्ति नकारात्मक भी हो सकती है और सकारात्मक भी । वह किसी को चोट नहीं पहुंचाती, बल्कि ऐसी स्थिति पैदा करती है जो मज़ेदार […]
मुट्ठी में दुअन्नी

बचपन में हम एक छोटी सी औद्योगिक बसाहट में रहते थे – तीन बँगले, ८-१० क्वार्टर, मजदूरों की बस्ती, एक डिस्पेंसरी और बैरकनुमा ऑफिसों के अहाते में एक राशन की दुकान – बस । अन्य सुविधाओं के लिए पास-दूर के गाँवों-कस्बों पर निर्भर रहना पड़ता था । ऐसी स्थिति में हमारे बड़े ही इंतज़ार, उत्साह […]