सिर्फ़ उन्हें आता है

सिर्फ़ उन्हें आता है उनसे अपने दिल का लगाना, हमे आता हैपर दिल्लगी करना, सिर्फ उन्हें आता है दिल्लगी — उपहास साकी से नज़र मिलाना, हमें आता हैऐसी खूबसूरत हरकत पे ऐतराज़ करना, सिर्फ उन्हे आता है ऐतराज़ — आपत्ति आशिकों की किताब में कभी, हमारा भी उम्दा नाम थापर जहाँ में हमें बदनाम करना, […]

कहत कबीर २०

कबीर ब्यास कथा कहै, भीतर भेदे नाहिं । // मानुस तेरा गुन बड़ा, मांस न आवे काज । कबीर संत कहे जाते हैं, पर इनके विचारों और रचनाओं का क्षेत्र केवल धर्म, अध्यात्म, चिंतन और भजन नहीं है। उन्होंने सांसारिक जीवन — व्यक्ति के चरित्र और व्यवहार; समाज की प्रचलित प्रथाओं, व्यवहारों और अंधविश्वासों; समाज […]

तनहाई और ख़ामोशी

तनहाई और ख़ामोशी तनहाई में ख़ामोशी ही साथ देती है, ख़ामोशी मे तनहाई समा जाती है रूह और दिल तो ख़ामोश रहते हैं, पर नींद और ख़्वाब तनाज़ा करते हैं . . तनाज़ा — संघर्ष ख़ामोश दिल का है प्यार ऐसा, गहराइयों के इज़हार जैसी ख़ामोशी सिर्फ़ लब पर ऐसी, रूह की पाक नज़र जैसी  ख़ामोशी […]

Thus Spake Kabeer 18

Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone. He also deals with worldly life – the character and behaviour of individuals; practices (and malpractices) rampant in society; evils of caste system which divides people into ‘high’ and ‘low’ classes, etc. He […]

Thus Spake Kabeer 19

Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone.  He also deals with worldly life – the character and behaviour of individuals; practices (and malpractices) rampant in society; evils of caste system which divides people into ‘high’ and ‘low’ classes, etc.  He […]

कहत कबीर १८

भगति दुहेली राम की, जैसी खाँड़े की धार । // कोई एक पावै संत जन, जाके पाँचूँ हाथि। कबीर संत कहे जाते हैं, पर इनके विचारों और रचनाओं का क्षेत्र केवल धर्म, अध्यात्म, चिंतन और भजन नहीं है। उन्होंने सांसारिक जीवन — व्यक्ति के चरित्र और व्यवहार; समाज की प्रचलित प्रथाओं, व्यवहारों और अंधविश्वासों; समाज […]

कहत कबीर १९

सोना सज्जन साधुजन, टूटे जुड़े सौ बार । // तन को जोगी सब करै, मन को करै न कोय । कबीर संत कहे जाते हैं, पर इनके विचारों और रचनाओं का क्षेत्र केवल धर्म, अध्यात्म, चिंतन और भजन नहीं है। उन्होंने सांसारिक जीवन — व्यक्ति के चरित्र और व्यवहार; समाज की प्रचलित प्रथाओं, व्यवहारों और […]

ये ज़रूरी तो नहीं

हम आपके आशिक हैं, दीवाने हैंआप हमको भी चाहें, ये ज़रूरी तो नहीं साक़ी पर हम मरते हैं, साक़िया देख कर जी भरते हैंसाक़ी की नज़र भी हम पर पड़े, ये ज़रूरी तो नहीं . साक़ी , साक़िया — शराब पिलनेवाला आप दुनिया में मशहूर हैं, आमफहम हैंदुनिया हमारी परवाह भी करे, ये ज़रूरी तो […]

Thus Spake Kabeer 17

Kabeerdaas ji is categorized as a saint but his thoughts and compositions are not confined to religion, spirituality, meditation and bhajans alone.  He also deals with worldly life – the character and behaviour of individuals; practices (and malpractices) rampant in society; evils of caste system which divides people into ‘high’ and ‘low’ classes, etc.  He […]

कहत कबीर १७

पानी केरा बुदबुदा, अस मानुस की जात । // दुख में सुमिरन सब करैं, सुख में करै न कोय । कबीर संत कहे जाते हैं, पर इनके विचारों और रचनाओं का क्षेत्र केवल धर्म, अध्यात्म, चिंतन और भजन नहीं है। उन्होंने सांसारिक जीवन — व्यक्ति के चरित्र और व्यवहार; समाज की प्रचलित प्रथाओं, व्यवहारों और […]