कहत कबीर ०२

निन्दक नियरे राखिये, आँगन कुटी, छवाय । // जहाँ दया तहाँ धर्म है, जहाँ लोभ तहाँ पाप । कबीरदास जी संत कहे जाते हैं, पर इनके विचारों और रचनाओं का क्षेत्र केवल धर्म, अध्यात्म, चिंतन और भजन नहीं है। उन्होंने सांसारिक जीवन — व्यक्ति के चरित्र और व्यवहार; समाज की प्रचलित प्रथाओं, व्यवहारों और अंधविश्वासों; […]

Why Humility ?

Service without humility is selfishness and egotism. — Mahatma Gandhi सेवा अगर विनम्रता से न की जाए तो वह निरा स्वार्थ और अहंकार है । — महात्मा गांधी Image Credit: Rudreshnnjadav, CC BY-SA 4.0 <https://creativecommons.org/licenses/by-sa/4.0>, via Wikimedia Commons

कबीर दास जी से प्रेरित कुछ दोहे — १

यह दोहे श्री अनूप जलोटा के गाये हुए “कबीर दोहे” की धुन पर सजते हैं Ego को न बढ़ाइए, Ego में है दोष  जो Ego को कम करे, उसे मिले संतोष मानुष ऐसा चाहिए, प्रेम से हो भरपूर सेवा सब की जो करे, रहे अहम् से दूर  “कबिरा” नगरी प्रेम की, उसमे तेरा वास  उस नगरी के द्वार पर, लिखा है “कर विश्वास” — राम बजाज Image Credits: https://www.tentaran.com/happy-kabir-das-jayanti-wishes-status-images/

Quality of the “Wise”

Just as a solid rock is not shaken by the storm, even so the wise are not affected by praise or blame. — Gautam Buddha बुद्धिमान की पहचान जिस तरह चट्टान तूफ़ान में भी अडिग रहती है, उसी प्रकार बुद्धिमान व्यक्ति भी प्रशंसा या निंदा से बिलकुल प्रभावित नहीं होते । — गौतम बुद्ध Image […]

Four types of people

He, who knows, and doesn’t know He knows,is Asleep, Wake Him. He, who doesn’t know, and knows that He doesn’t know,is a Child, Teach Him. He, who knows, and knows that he knows,is Wise, Learn from Him. He, who doesn’t know, and doesn’t know that He doesn’t knowis a Fool, Shun Him. — Confucius चार […]

कहत कबीर ०४

बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर । // काम क्रोध मद लोभ की, जब लग घट में खानि । कबीरदास जी संत कहे जाते हैं, पर इनके विचारों और रचनाओं का क्षेत्र केवल धर्म, अध्यात्म, चिंतन और भजन नहीं है। उन्होंने सांसारिक जीवन — व्यक्ति के चरित्र और व्यवहार; समाज की प्रचलित प्रथाओं, […]

कहत कबीर ०३

ऊँचे पानी ना टिकै, नीचे ही ठहराय । // बुरा जो देखन मैं चला , बुरा न मिलिया कोय । ऊँचे पानी ना टिकै, नीचे ही ठहराय//बुरा जो देखन मैं चला , बुरा न मिलिया कोय// कबीरदास जी संत कहे जाते हैं, पर इनके विचारों और रचनाओं का क्षेत्र केवल धर्म, अध्यात्म, चिंतन और भजन […]