The Bhagwad Gita — Chapter 2_1

सांख्य योग — देह – देह विवेक Sankhya Yoga — Deh – Deh Vivek The Bhagwad Gita Chapter 2 (1) Sanjay Mehta सांख्य योगदेह – देह विवेक Saankhya YogaDeha – Deha Vivek This portion (Shloka 11 onwards) is the beginning of the Bhagwad Gita teachings. Bhagwan explains the principle of Deha-Dehi Viveka (Body – Atman […]
कहत कबीर ०१

दोस पराए देख करि, चलत हसन्त हसन्त । // दीन, गरीबी, बंदगी, सब सों आदर भाव । कबीरदास जी संत कहे जाते हैं, पर इनके विचारों और रचनाओं का क्षेत्र केवल धर्म, अध्यात्म, चिंतन और भजन नहीं है। उन्होंने सांसारिक जीवन — व्यक्ति के चरित्र और व्यवहार; समाज की प्रचलित प्रथाओं, व्यवहारों और अंधविश्वासों; समाज […]
कहत कबीर ०२

निन्दक नियरे राखिये, आँगन कुटी, छवाय । // जहाँ दया तहाँ धर्म है, जहाँ लोभ तहाँ पाप । कबीरदास जी संत कहे जाते हैं, पर इनके विचारों और रचनाओं का क्षेत्र केवल धर्म, अध्यात्म, चिंतन और भजन नहीं है। उन्होंने सांसारिक जीवन — व्यक्ति के चरित्र और व्यवहार; समाज की प्रचलित प्रथाओं, व्यवहारों और अंधविश्वासों; […]
कबीर दास जी से प्रेरित कुछ दोहे — १

यह दोहे श्री अनूप जलोटा के गाये हुए “कबीर दोहे” की धुन पर सजते हैं Ego को न बढ़ाइए, Ego में है दोष जो Ego को कम करे, उसे मिले संतोष मानुष ऐसा चाहिए, प्रेम से हो भरपूर सेवा सब की जो करे, रहे अहम् से दूर “कबिरा” नगरी प्रेम की, उसमे तेरा वास उस नगरी के द्वार पर, लिखा है “कर विश्वास” — राम बजाज Image Credits: https://www.tentaran.com/happy-kabir-das-jayanti-wishes-status-images/
Quality of the “Wise”

Just as a solid rock is not shaken by the storm, even so the wise are not affected by praise or blame. — Gautam Buddha बुद्धिमान की पहचान जिस तरह चट्टान तूफ़ान में भी अडिग रहती है, उसी प्रकार बुद्धिमान व्यक्ति भी प्रशंसा या निंदा से बिलकुल प्रभावित नहीं होते । — गौतम बुद्ध Image […]
कहत कबीर ०४

बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर । // काम क्रोध मद लोभ की, जब लग घट में खानि । कबीरदास जी संत कहे जाते हैं, पर इनके विचारों और रचनाओं का क्षेत्र केवल धर्म, अध्यात्म, चिंतन और भजन नहीं है। उन्होंने सांसारिक जीवन — व्यक्ति के चरित्र और व्यवहार; समाज की प्रचलित प्रथाओं, […]
कहत कबीर ०३

ऊँचे पानी ना टिकै, नीचे ही ठहराय । // बुरा जो देखन मैं चला , बुरा न मिलिया कोय । ऊँचे पानी ना टिकै, नीचे ही ठहराय//बुरा जो देखन मैं चला , बुरा न मिलिया कोय// कबीरदास जी संत कहे जाते हैं, पर इनके विचारों और रचनाओं का क्षेत्र केवल धर्म, अध्यात्म, चिंतन और भजन […]