मैडम और गंगू बाई (३)

मैडम और गंगू बाई (३) मैडम जी को आवाज़, उनकी शख़्सियत की तरह, दबंग मिली थीजब वह बोलतीं, तो sound meter की सूई, 80 dB के पार होती थी जिसे फोन किया उसके घर में, बिना स्पीकर फोन के, वार्तालाप सबको सुनाई पड़ता थाकइयों के कई बार, धीरे बोलने के सुझावों का, उन पर कोई […]

कौन बदलता है?

कौन बदलता है? वो नहीं बदले, जो कहते थे कि तुम बदलो,वो भी नहीं बदले, जिन्हे हमने कहा बदलो ।इन्ही उपदेशों के चलते, हुए कई द्वंद्व और संग्राम,हुए विध्वंस शांति, जीव, पर न वो बदले न हम बदले । — विनोद

मजबूरी की शांति

हर शाम, गंगू बाई से काम करा कर थकी हुई गृहणियों का, जमावड़ा हुआ करता था कुछ अपने घर, ज्यादह दूसरों के घर, की बातों के बीच, ठहाकों से बड़ा शोर हुआ करता था एक दिन आश्चर्य से, भीड़ बड़ी थी, पर बातें सिर्फ़ फुसफुसाहटों में हो रही थीं जाँच-पड़ताल की, तो पता चला, आज […]

मैडम और गंगू बाई (२)

कम्युनिकेशन प्रॉब्लम (Communication Problem) आज फिर मेज पर, गलत डिशेज़ और कटलरी थी आईदेख कर पारा चढ़ा, और मैडम जी जोर से चिल्लाईं“अरे ओ गंगू बाईये क्या बर्तन ले आईसौ बार बताने पर भी बात क्यों समझ में नहीं आई?” गंगू बाई बोलीं इतने साल से, मैडम जी, मैं आपके साथ काम करती आईमुश्किल है […]

मैडम और गंगू बाई (१)

अपराधी कौन? अचानक चौके से कांच का बर्तन टूटने की आवाज़ आईमन ही मन सोचा “आज तो गंगू बाई की है शामत आई”सन्नाटा बना रहाबहुत ही आश्चर्य हुआदेखा तो पता चला, तश्तरी तो मैडम जी ने थी गिराई — विनोद Image Credit: https://pixabay.com/vectors/cartoon-cleaning-comic-characters-2029192/

बन्दर की पूंछ

बन्दर की पूंछ (पंचतंत्र की एक कहानी पर आधारित) बहुत दिनों पहले जंगल में, रहते थे कुछ बन्दरइधर कूदते, उधर फाँदते, खेला करते दिन भर इसी झुण्ड मे था इक बन्दर, चंचल और शैतानइसे छेड़ना, उसे तोड़ना, यही था उसका काम एक दोपहर, वह सब बन्दर, पहुंचे एक जगह परकारीगर कुछ, बना रहे थे, एक […]