लफ़्ज़ों में क्या रखा है
कहा कुछ तुमने ?– सुना नहीं, दुआ थी या बद्दुआ, पता नही । हाँ और ना से, हक़ीक़त बदलते देखी बातों का अब मुझे, आसरा नहीं । लफ़्ज़ों की हेरा फेरी है शायद मुझको उसकी परवाह नहीं । गले मिलो तो, सब पिघलेगा, दोस्ती भी कोई, गुनाह नहीं । ग्रंथों की भाषा नहीं आती ऊपर वाले बात […]